इक्विटी किसी ट्रेडिंग अकाउंट की रियल-टाइम वैल्यू है, जिसमें अकाउंट बैलेंस और खुली पोज़िशन का कोई भी अनरियलाइज़्ड मुनाफ़ा या नुकसान, दोनों शामिल होते हैं। जब तक ट्रेड खुले रहते हैं, बाज़ार की कीमतों के साथ यह लगातार बदलती रहती है। इक्विटी ट्रेडर्स को किसी भी पल उनके अकाउंट की मौजूदा वैल्यू की सटीक तस्वीर देती है।
बैलेंस के उलट, इक्विटी बाज़ार में चल रहे एक्सपोज़र को दिखाती है। prop firms अक्सर रियल टाइम में रिस्क पर नज़र रखने के लिए इक्विटी का इस्तेमाल करती हैं, खास तौर पर drawdown की गणना और डेली लॉस लिमिट के लिए।
प्रॉप ट्रेडिंग में इक्विटी क्यों मायने रखती है
चल रहे ट्रेड के दौरान रिस्क मैनेज करने के लिए इक्विटी बहुत ज़रूरी है। क्योंकि इसमें फ़्लोटिंग मुनाफ़ा और नुकसान शामिल होता है, यह दिखाती है कि ट्रेड बंद होने से पहले कोई ट्रेडर drawdown या डेली लॉस नियम तोड़ने के कितने करीब है। जो ट्रेडर्स इक्विटी रिस्क को नज़रअंदाज़ करते हैं, वे बैलेंस ठीक दिखने पर भी लिमिट ब्रीच कर सकते हैं।
कई prop firms इक्विटी-आधारित drawdown या ट्रेलिंग drawdown मॉडल इस्तेमाल करती हैं। इक्विटी को समझने से ट्रेडर्स पोज़िशन साइज़ कंट्रोल कर पाते हैं, खुले ट्रेड मैनेज कर पाते हैं और वोलैटिलिटी से होने वाले अचानक ब्रीच से बच पाते हैं। बैलेंस के साथ-साथ इक्विटी पर नज़र रखने से ट्रेडिंग ज़्यादा सुरक्षित और अनुशासित बनती है।
इक्विटी का उदाहरण
एक ट्रेडर का अकाउंट बैलेंस 1,00,000 है और एक खुले ट्रेड में 2,000 का अनरियलाइज़्ड मुनाफ़ा दिख रहा है। इक्विटी 1,02,000 हो जाती है। अगर बाज़ार पोज़िशन के खिलाफ़ जाता है और अनरियलाइज़्ड नुकसान 3,000 तक पहुँच जाता है, तो इक्विटी गिरकर 97,000 हो जाती है, जबकि ट्रेड बंद होने तक बैलेंस वही रहता है।



