Drawdown का मतलब है ट्रेडिंग में हुए नुकसान की वजह से किसी अकाउंट की वैल्यू का उसके सबसे ऊँचे स्तर से नीचे के स्तर तक गिरना। यह मापता है कि किसी तय अवधि में कितनी कैपिटल गँवाई गई, और यह प्रॉप ट्रेडिंग के सबसे अहम रिस्क मेट्रिक्स में से एक है। फ़र्म के नियमों के हिसाब से drawdown अकाउंट बैलेंस, इक्विटी या दोनों के मेल से गिना जा सकता है।
prop firms रिस्क को कंट्रोल करने के लिए सख़्त drawdown लिमिट तय करती हैं। अगर कोई ट्रेडर तय drawdown से आगे निकल जाता है, तो अकाउंट ब्रीच माना जाता है और ट्रेडिंग के अधिकार छीन लिए जाते हैं।
प्रॉप ट्रेडिंग में drawdown क्यों मायने रखता है
drawdown के नियम इसलिए हैं ताकि ट्रेडर्स लगातार रिस्क मैनेज करें। मुनाफ़े में चल रहे ट्रेडर्स भी prop firm प्रोग्राम में फ़ेल हो सकते हैं अगर वे नुकसान को बहुत बड़ा होने देते हैं। drawdown को समझने से ट्रेडर्स सही पोज़िशन साइज़ चुन पाते हैं और नुकसान के बाद भावनाओं में आकर फ़ैसले लेने से बचते हैं।
अलग-अलग prop firms drawdown को अलग-अलग तरीकों से लागू करती हैं। कुछ बैलेंस-आधारित drawdown इस्तेमाल करती हैं, तो कुछ इक्विटी-आधारित या ट्रेलिंग drawdown मॉडल। जो ट्रेडर्स इन स्ट्रक्चर को समझते हैं, वे अपनी ट्रेडिंग स्टाइल और रिस्क सहने की क्षमता के हिसाब से बेहतर प्रोग्राम चुन सकते हैं।
Drawdown का उदाहरण
एक ट्रेडर 1,00,000 के अकाउंट से शुरुआत करता है और 1,05,000 के पीक बैलेंस तक पहुँचता है। कई नुकसान वाले ट्रेड के बाद अकाउंट 98,000 पर आ जाता है। पीक बैलेंस से मापा गया drawdown 7,000 है। अगर फ़र्म का अधिकतम अनुमत drawdown 8,000 है, तो ट्रेडर अभी भी लिमिट के अंदर है।



