डेली लॉस लिमिट एक रिस्क मैनेजमेंट नियम है जो तय करता है कि कोई ट्रेडर एक ट्रेडिंग दिन में ज़्यादा से ज़्यादा कितना नुकसान कर सकता है। अगर नुकसान इस लिमिट तक पहुँच जाता है, तो ट्रेडर उस दिन आगे ट्रेडिंग नहीं कर सकता। कई prop firms में डेली लॉस लिमिट पार करने पर तुरंत ब्रीच हो जाता है और अकाउंट फ़ेल हो जाता है।
डेली लॉस लिमिट आम तौर पर एक तय रकम के रूप में या अकाउंट साइज़ या बैलेंस के प्रतिशत के रूप में गिनी जाती है। यह फ़र्म के तय ट्रेडिंग सेशन के हिसाब से हर नए ट्रेडिंग दिन की शुरुआत में रीसेट होती है।
प्रॉप ट्रेडिंग में डेली लॉस लिमिट क्यों मायने रखती है
डेली लॉस लिमिट ट्रेडर और prop firm दोनों को भावनात्मक या बेकाबू ट्रेडिंग से होने वाले भारी नुकसान से बचाती है। यह ट्रेडर्स को किसी खराब ट्रेडिंग दिन में ओवरट्रेडिंग या बहुत बड़ी पोज़िशन लेकर नुकसान की भरपाई करने की कोशिश से रोकती है।
डेली लॉस लिमिट कैसे गिनी जाती है, यह समझने से ट्रेडर्स रिस्क को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाते हैं। जो ट्रेडर्स इस लिमिट का सम्मान करते हैं, वे आम तौर पर ज़्यादा अनुशासन और कंसिस्टेंसी के साथ ट्रेड करते हैं। इसे नज़रअंदाज़ करना उन सबसे आम कारणों में से एक है जिनकी वजह से ट्रेडर्स challenges में फ़ेल होते हैं और फंडेड अकाउंट गँवा देते हैं।
डेली लॉस लिमिट का उदाहरण
एक ट्रेडर के पास 1,00,000 का अकाउंट है जिसकी डेली लॉस लिमिट 5,000 है। अगर एक दिन में उसके बंद ट्रेड और फ़्लोटिंग नुकसान मिलकर 5,000 तक पहुँच जाते हैं, तो उसे ट्रेडिंग रोकनी होगी। अगर लिमिट पार हो जाती है, तो अकाउंट ब्रीच माना जाता है, भले ही बाद में बैलेंस वापस ठीक हो जाए।



